श्रीडूंगरगढ़, 14 नवंबर 2025। आडसर बास में आज शोक की लहर दौड़ गई। पवन कुमार चौपड़ा, जो 57 वर्ष के थे, अब इस दुनिया में नहीं रहे। शुभकरण चौपड़ा के पुत्र पवन कुमार ने जीवन की आपाधापी से विराम ले लिया। इस दुखद घड़ी में, परिवार ने एक ऐसा फैसला लिया, जिसने मानवीय संवेदनाओं को एक नई ऊंचाई दी।
पवन जी के निधन के बाद, उनके परिजनों ने नेत्रदान करने का निर्णय लिया। यह निर्णय आई बैंक, प्राणनाथ हॉस्पिटल, सरदारशहर के सहयोग से साकार हुआ। यह एक ऐसा कदम था, जिसने शोक को प्रेरणा में बदल दिया।
इस प्रेरणा के पीछे तेरापंथ युवक परिषद, श्रीडूंगरगढ़ के उपाध्यक्ष चमन श्रीमाल का मार्गदर्शन था। परिषद ने इस पूरे कार्य में सक्रिय भूमिका निभाई। फूसराज चौपड़ा, चन्दा देवी चौपड़ा, यश चौपड़ा, मेघा चौपड़ा और स्वीटी श्रीमाल जैसे परिवार के सदस्यों ने नेत्रदान के लिए अपनी सहमति दी।
इस पुनीत कार्य में जगदीश मालू, शूरवीर मोदी, पवन पुगलिया, शिव दर्जी, मोहित बोरड़ और श्रेयांस झाबक जैसे समाजसेवियों की उपस्थिति ने इसे और भी महत्वपूर्ण बना दिया। अशोक झाबक ने इस पूरी प्रक्रिया का संयोजन किया, और अभातेयुप नेत्रदान राज्य प्रभारी रोशन नाहर का मार्गदर्शन और सहयोग भी मिला।
तेरापंथ युवक परिषद, जो हमेशा सामाजिक कार्यों में तत्पर रहती है, ने इस अवसर पर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की और परिवार के इस मानवीय निर्णय की सराहना की। पवन चौपड़ा के नेत्रदान से अब दो व्यक्तियों को नई दृष्टि मिलने की संभावना है। यह एक ऐसा कार्य है, जो मृत्यु के बाद भी जीवन को रोशन करेगा। यह खबर न केवल एक परिवार के शोक की कहानी है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं की एक ऐसी मिसाल भी है जो हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपने जीवन को कैसे सार्थक बना सकते हैं।