सूर्य की पहली किरण के साथ ही गांव में उत्सव का माहौल छा गया। शीतला माता मंदिर से चूनरी यात्रा का आरंभ हुआ। रंग-बिरंगे परिधानों में सजे श्रद्धालु, जिनमें महिलाएं, युवतियां और युवा शामिल थे, हाथों में श्रद्धापूर्वक चूनरी थामे यात्रा में आगे बढ़ रहे थे। बैंड-बाजों की मधुर ध्वनि और “जय माता दी” के गगनभेदी जयकारों से आडसर गांव भक्तिमय हो गया। ऐसा लग रहा था मानो पूरी प्रकृति ही मां के जयकारों में शामिल हो गई हो।
यह यात्रा गांव के मुख्य मार्गों से गुजरी। हर गली, हर चौराहे पर श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता था। हर कोई मां के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित करने को आतुर था।
यात्रा का समापन आडसर माता धाम में हुआ। यहां उपस्थित भक्त भावविभोर हो उठे जब मां भगवती के चरणों में 501 मीटर की विशाल चूनरी अर्पित की गई। इस अवसर पर मां की एक सजीव झांकी भी सजाई गई थी। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो मां स्वयं भक्तों को दर्शन देने पधारी हों। झांकी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ पड़ी, हर आंख में श्रद्धा और कृतज्ञता के भाव थे।
यह आयोजन आडसर गांव के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव था, जिसने मां भगवती के प्रति लोगों की आस्था को और भी गहरा कर दिया। यह एक ऐसा दृश्य था जो लंबे समय तक लोगों के दिलों में बसा रहेगा।