कार्यक्रम मालू भवन में आयोजित किया गया, जहाँ साध्वी संगीतश्री जी और डॉ. परमप्रभा जी के सान्निध्य ने वातावरण को और भी पवित्र बना दिया। साध्वी संगीतश्री जी ने अपने प्रवचन में बच्चों को जीवन में सहिष्णुता, विनम्रता और अहिंसा के मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि ये मूल्य न केवल व्यक्तिगत विकास के लिए आवश्यक हैं, बल्कि एक शांतिपूर्ण और सामंजस्यपूर्ण समाज के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
आयोजन प्रभारी मनोज गुसाईं ने बताया कि प्रतियोगिता का उद्देश्य बच्चों को अहिंसा और नशा मुक्त जीवन के महत्व के प्रति जागरूक करना था। बच्चों ने अपनी कला के माध्यम से इस विषय को चित्रित किया, जिसमें रंगों और रेखाओं के माध्यम से एक बेहतर भविष्य की कल्पना की गई।
शिक्षाविद् रूपचंद सोनी और पत्रकार कपिला स्वामी ने निर्णायक की भूमिका निभाई। उन्होंने बच्चों की रचनात्मकता और विषय के प्रति उनकी समझ की सराहना की। समिति अध्यक्ष सुमति पारख, उपाध्यक्ष सत्यनारायण स्वामी और अन्य सदस्यों ने विजेताओं को पुरस्कृत किया।
कार्यक्रम में गोपाल शर्मा, विवेक उपाध्याय, दुर्गाप्रसाद पालीवाल, कांतिप्रकाश दर्जी, डॉली भंसाली, प्रमोदी शर्मा और हीरालाल जैसे अतिथियों का भी सम्मान किया गया।
प्रतियोगिता में भाग लेने वाले विद्यालयों में संस्कार इनोवेटिव पब्लिक स्कूल, एजी मिशन स्कूल, जयपुर पब्लिक स्कूल, सेसोमूं स्कूल, ज्ञानदीप पब्लिक एकेडमी, महाराणा प्रताप सीनियर सैकेंडरी स्कूल, सनफ्लावर पब्लिक एकेडमी, श्री कन्हैयालाल सिखवाल राजकीय अंग्रेजी स्कूल और श्रीडूंगरगढ़ पब्लिक स्कूल शामिल थे।
अहिंसा का संदेश देते हुए प्रभावी चित्र बनाने वाली प्रतिज्ञा सोनी (संस्कार इनोवेटिव स्कूल) ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। निकुंज सारस्वत (संस्कार इनोवेटिव स्कूल) दूसरे और वीणा नाई (सनफ्लावर पब्लिक एकेडमी) तीसरे स्थान पर रहीं। अवंतिका सारस्वत (संस्कार इनोवेटिव स्कूल) और सुहानी (ज्ञानदीप पब्लिक एकेडमी) को सांत्वना पुरस्कार दिए गए।
विजेताओं को चमचमाती ट्रॉफियां देकर सम्मानित किया गया, और निर्णायकों को स्मृति चिह्न भेंट किए गए। अणुव्रत समिति अध्यक्ष सुमति पारख ने सभी बच्चों का आभार व्यक्त किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
कार्यक्रम के दौरान समिति के सदस्य खासे सक्रिय रहे। सभी बच्चों के लिए अल्पाहार की व्यवस्था भी की गई थी। कार्यक्रम का संचालन करते हुए के.एल. जैन ने सभी का आभार जताया। यह कार्यक्रम श्रीडूंगरगढ़ में अहिंसा के संदेश को फैलाने और बच्चों को रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए एक मंच प्रदान करने में सफल रहा।