श्रीडूंगरगढ़, 21 अगस्त, 2025। भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित माँ तनोटराय के मंदिर की महिमा अपरम्पार है। दूर-दूर से भक्त यहाँ अपनी मनोकामनाएँ लेकर आते हैं। इसी आस्था के साथ, देराजसर और दुलचासर गाँव से याराना पैदल यात्री संघ, शुक्रवार की शाम 6:15 बजे गाजा-बाजा के साथ तनोटराय के दर्शन के लिए प्रस्थान करेगा।
संघ के सदस्य जयनारायण शर्मा बताते हैं कि माँ तनोटराय ने सदैव राष्ट्र की सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यही कारण है कि मंदिर की पूरी व्यवस्था सीमा सुरक्षा बल (BSF) के हाथों में है।
संघ के नेतराम भादू के अनुसार, दरबार में आने वाले श्रद्धालु खेजड़ी के पत्तों से बने रुमाल बांधते हैं। ऐसा माना जाता है कि माँ अपने भक्तों की हर मुराद पूरी करती हैं, और इसी वजह से उन्हें ‘रुमाल वाली देवी’ के नाम से भी जाना जाता है।
संघ के संरक्षक डॉ. जे.पी. चौधरी ने जानकारी दी कि यात्री पहले 29 अगस्त को रामदेवरा में बाबा रामदेव की समाधि के दर्शन करेंगे। इसके बाद, 4 सितम्बर को वे तनोटराय के दरबार में पहुँचकर अपनी श्रद्धा अर्पित करेंगे।
यह पदयात्रा, आस्था और भक्ति का एक अनुपम उदाहरण है, जो माँ तनोटराय के प्रति अटूट विश्वास को दर्शाता है।