इस मामले में परिवादी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मोहनलाल सोनी ने न्यायालय में अपनी दलीलें पेश कीं। उन्होंने घटना की गंभीरता और आरोपी की संलिप्तता को रेखांकित किया। राज्य सरकार की ओर से अपर लोक अभियोजक सोहन नाथ सिद्ध ने भी मामले की पैरवी करते हुए ठोस तर्क रखे।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) सरिता नौशाद ने दोनों पक्षों की दलीलों को ध्यानपूर्वक सुना और गहन विचार-विमर्श के बाद आरोपी मनोज की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। न्यायालय का यह निर्णय मामले की संवेदनशीलता और साक्ष्यों की गंभीरता को दर्शाता है।
परिवादी पक्ष की अधिवक्ता दीपिका करनाणी ने बताया कि यह दुखद घटना लगभग दो वर्ष पूर्व घटी थी, जब तोलियासर जा रहे पैदल यात्रियों के समूह में सांवरमल सुथार की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में आरोपी मनोज पिछले दो वर्षों से केंद्रीय कारागार, बीकानेर में न्यायिक हिरासत में है।
इस घटना ने क्षेत्र में गहरा शोक उत्पन्न किया था और न्याय की मांग को बल मिला था। न्यायालय द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद, अब सभी की निगाहें आगे की कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हैं, जहाँ न्याय और सत्य की स्थापना की प्रतीक्षा है। यह घटना एक बार फिर समाज में शांति और सद्भाव बनाए रखने की आवश्यकता पर बल देती है।