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जिले भर में बिजली संकट पर एकजुट दिखी कांग्रेस, बड़े नेताओं ने की कलेक्टर से मुलाकात

जिले के किसान एक कठिन दौर से गुज़र रहे हैं, और उनकी व्यथा को आवाज़ देने के लिए शुक्रवार को कांग्रेस पार्टी एकजुट होकर सामने आई। किसानों की समस्याओं के विरोध में जिले भर के कांग्रेसी नेता एक साथ नज़र आए।

कांग्रेस देहात जिलाध्यक्ष बिशनाराम सिहाग के आह्वान पर, जिले के प्रमुख नेता कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को हो रही बिजली संबंधी परेशानियों का ज़िक्र किया गया।

नेताओं ने ज्ञापन में मांग की कि ग्रामीण क्षेत्रों में हर हालत में 6 घंटे बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने ट्रिपिंग और कम वोल्टेज की समस्या को उजागर करते हुए बताया कि इससे किसानों की मोटरें जल रही हैं। उन्होंने बिना ट्रिपिंग के पूरे वोल्टेज की बिजली आपूर्ति की मांग की।

इसके अतिरिक्त, टूटे हुए बिजली के तारों और खंभों को तुरंत दुरुस्त करने, ग्रामीण क्षेत्रों के जीएसएस पर अतिरिक्त पावर ट्रांसफार्मर लगाने और उनकी क्षमता बढ़ाने की मांग की गई। ढाणियों में नियमानुसार घरेलू बिजली कनेक्शन देने और विभागीय लापरवाही के कारण हो रही बिजली कर्मचारियों की मौतों को रोकने पर भी ज़ोर दिया गया।

बिशनाराम सिहाग ने बताया कि ज्ञापन देने वालों में नोखा विधायक सुशीला डूडी, जिला प्रमुख मोड़ाराम मेघवाल, पूर्व मंत्री भंवरसिंह भाटी, पूर्व मंत्री गोविंदराम मेघवाल, श्रीडूंगरगढ़ से मंगलाराम गोदारा, लूणकरणसर से राजेन्द्र मूंड, शहर अध्यक्ष यशपाल गहलोत, प्रह्लाद सिंह मार्शल, राहुल जादूसंगत, नितिन वत्स जैसे प्रमुख नेता शामिल थे।

सभी नेताओं ने एक स्वर में इस बात पर चिंता व्यक्त की कि इस बार बारिश की कमी के कारण किसानों के सामने फसलें बचाने का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि ऐसे में बिजली संबंधी समस्याएं “कोढ़ में खाज” के समान हैं। नेताओं ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए तत्काल प्रभाव से बिजली समस्याओं का समाधान करने की मांग की और ऐसा न होने पर जिले भर में आंदोलन की चेतावनी दी।

यह घटनाक्रम किसानों की वर्तमान स्थिति और उनकी समस्याओं के प्रति राजनीतिक संवेदनशीलता को दर्शाता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस पर कैसी प्रतिक्रिया देता है और किसानों को राहत पहुंचाने के लिए क्या कदम उठाता है।

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