गुरुवार को जिला निर्वाचन अधिकारी श्रीमती नम्रता वृष्णि की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में, श्रीमती वृष्णि ने बताया कि राज्य में 1200 से अधिक मतदाताओं वाले सभी मतदान केंद्रों का पुनर्गठन किया जाएगा।
उन्होंने जानकारी दी कि वर्तमान में जिले में 1638 मतदान केंद्र हैं और पुनर्गठन के बाद यह संख्या बढ़कर 1950 हो जाएगी। 1200 से अधिक मतदाताओं वाले मतदान केंद्रों के पुनर्गठन की प्रक्रिया में, यथासंभव मतदाताओं का समायोजन आसपास के मतदान केंद्रों पर किया जाएगा। नए मतदान केंद्र का गठन तभी किया जाएगा जब समायोजन का कोई विकल्प नहीं होगा।
श्रीमती वृष्णि ने जोर दिया कि पुनर्गठन या विभाजन के बाद, कुल मतदाताओं की संख्या का मिलान आवश्यक रूप से किया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी मतदाता छूटा नहीं है। एक परिवार, भवन या कॉलोनी में पंजीकृत मतदाताओं को एक ही अनुभाग में रखा जाएगा, और अनुभाग विभाजन की स्थिति में भी एक परिवार के सदस्यों को एक साथ रखा जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी मतदाता को मतदान केंद्र तक पहुंचने के लिए 2 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय न करनी पड़े और मतदान केंद्र के रास्ते में कोई प्राकृतिक बाधा न हो। जनप्रतिनिधियों और आम मतदाताओं से प्राप्त शिकायतों और सुझावों पर भी पुनर्गठन प्रक्रिया के दौरान ध्यान दिया जाएगा ताकि मतदाताओं की सुविधा सुनिश्चित की जा सके।
उप जिला निर्वाचन अधिकारी रामावतार कुमावत ने प्रत्येक मतदान केंद्र के लिए बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) द्वितीय की नियुक्ति तत्काल करने के निर्देश दिए और इससे संबंधित दिशानिर्देशों की जानकारी दी।
बैठक में भारतीय जनता पार्टी से श्याम सिंह हाडला और दिलीप सिंह आड़सर, कांग्रेस से प्रहलाद सिंह मार्शल, नायब तहसीलदार सुभाष चंद्र मीणा और निर्वाचन शाखा के शिव कुमार पुरोहित उपस्थित थे।