मामले की पृष्ठभूमि कुछ इस प्रकार है कि परिवादी दिनेश कुमार सोनी ने आरोप लगाया था कि परमेश्वर लाल ने उनसे सोने का उधार लिया था। भुगतान के लिए दिए गए चेक जब बैंक में जमा किए गए, तो वे अनादरित हो गए। इसके बाद दिनेश कुमार सोनी ने अदालत का दरवाज़ा खटखटाया और न्यायालय में परिवाद दायर किया।
परिवादी की अधिवक्ता दीपिका करनाणी ने बताया कि इस मामले की सुनवाई करते हुए एसीजेएम कोर्ट ने परमेश्वर लाल को दोषी पाया। अदालत ने उन्हें दो वर्ष के कारावास की सजा सुनाई और साथ ही परिवादी दिनेश कुमार सोनी को हर्जाने के तौर पर 2.5 लाख रुपये अदा करने के आदेश भी दिए।
इस फैसले के खिलाफ परमेश्वर लाल ने एडीजे कोर्ट में अपील दायर की, लेकिन वहां भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली। एडीजे कोर्ट ने उनकी अपील को खारिज करते हुए उन्हें तुरंत जेल भेजने के आदेश दे दिए।
इसके बाद, परमेश्वर लाल ने जोधपुर हाईकोर्ट में रिवीजन याचिका पेश कर जमानत की गुहार लगाई। लेकिन विधिक प्रक्रिया के अनुसार, हाईकोर्ट ने भी उनकी याचिका को खारिज कर दिया। इस प्रकार, सभी न्यायिक विकल्पों के समाप्त होने के बाद, परमेश्वर लाल को अब अपनी सजा जेल में ही काटनी होगी। यह मामला कानूनी प्रक्रिया के विभिन्न चरणों से गुज़रा है और प्रत्येक स्तर पर परमेश्वर लाल को निराशा ही हाथ लगी है।