आगामी 15 नवंबर की शाम 6 बजे, प्रदेश के सातों संभाग मुख्यालयों – बीकानेर, जयपुर, जोधपुर, अजमेर, भरतपुर, कोटा और उदयपुर में एक साथ घूमर का यह भव्य आयोजन होगा।
बीकानेर में, डॉ. करणी सिंह स्टेडियम इस उत्सव का साक्षी बनेगा। आयोजन को सफल बनाने के लिए तैयारियां ज़ोरों पर हैं। सोमवार को जिला कलेक्ट्रेट में अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (शहर) रमेश देव की अध्यक्षता में विभिन्न विभागों के बीच एक समन्वय बैठक हुई, जिसमें आयोजन की रूपरेखा पर विचार-विमर्श किया गया।
यह महोत्सव एक साथ प्रदेश के सभी संभाग मुख्यालयों पर आयोजित किया जाएगा। 12 वर्ष से अधिक आयु की महिलाएं और बालिकाएं इसमें भाग ले सकेंगी। प्रवेश के लिए पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा अनिवार्य होगी। अक्टूबर के पहले सप्ताह से पंजीकरण निःशुल्क शुरू हो जाएंगे, और पंजीकरण करवाने वालों को ऑनलाइन प्रमाणपत्र भी प्रदान किया जाएगा।
नृत्य की प्रस्तुति को और निखारने के लिए 7 दिन की विशेष कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा।
महोत्सव में केवल समूह नृत्य को ही पुरस्कृत किया जाएगा। विजेताओं और उपविजेताओं को पांच श्रेणियों में नकद पुरस्कार दिए जाएंगे:
* सर्वश्रेष्ठ समूह नृत्य
* सर्वश्रेष्ठ समूह वेशभूषा
* सर्वश्रेष्ठ समूह आभूषण
* सर्वश्रेष्ठ समूह तालमेल
* सर्वश्रेष्ठ समूह कोरियोग्राफर
यह ध्यान देने योग्य है कि एकल प्रस्तुतियों को पुरस्कार श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है।
पर्यटन विभाग के संयुक्त निदेशक अनिल राठौड़ के अनुसार, यदि किसी समूह में 20 से अधिक सदस्य होंगे, तो प्रत्येक सदस्य को ₹500 की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
राठौड़ ने कहा, “हम चाहते हैं कि घूमर को वह पहचान मिले जो गुजरात के गरबा को मिली है। भविष्य में, यूनेस्को की हेरिटेज लिस्ट में घूमर को शामिल कराने की दिशा में यह पहला कदम है।”
उत्सव में उद्योग विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा स्थानीय उत्पादों के स्टॉल भी लगाए जाएंगे, जो महिलाओं के स्वावलंबन और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने में सहायक होंगे।
बैठक में सहायक पर्यटन अधिकारी नेहा शेखावत, वरिष्ठ सहायक योगेश राय, सहायक प्रोग्रामर संदीप टेलर सहित कई अधिकारी उपस्थित थे।
यह आयोजन न केवल राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगा। उम्मीद है कि घूमर महोत्सव राजस्थान की कला और संस्कृति को विश्व मंच पर स्थापित करने में मील का पत्थर साबित होगा।