कहानी शुरू होती है सींथल निवासी कैलाश कुम्हार से, जो अपनी ऊंटगाड़ी से खेळी में पानी डालने जा रहे थे। उनकी नज़र पड़ी तीन युवकों पर, जो जाल बिछा रहे थे। संदेह होने पर उन्होंने बिना देर किए सरपंच प्रतिनिधि और एडवोकेट गणेश दान बीठू को सूचित किया।
एडवोकेट बीठू ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल वन विभाग और नापासर पुलिस को इसकी जानकारी दी। तत्परता दिखाते हुए सहायक वन संरक्षक सत्यपाल सिंह, महेश जाखड़, सहायक वनपाल सुरेंद्र कुमार और हेड कांस्टेबल मूलाराम की टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुंची।
टीम ने मौके पर ही अनिल कुमार वाल्मीकि (18), पंकज कुमार वाल्मीकि (21) और गुलाबचंद उर्फ कालू (20), तीनों निवासी मोमासर बास, श्रीडूंगरगढ़ को गिरफ्तार कर लिया। उनके कब्ज़े से भारी मात्रा में जाल और हथियार बरामद हुए।
तीनों आरोपियों को हिरासत में लेकर बीकानेर वन विभाग कार्यालय भेजा गया है, जहाँ उनसे पूछताछ जारी है। इस संबंध में सहायक वन संरक्षक सत्यपाल सिंह ने बताया कि पूछताछ में सहयोग के लिए दो और लोगों को बुलाया गया है, जिनमें से एक नाबालिग है। पूछताछ के बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी।
इस घटना के बाद एडवोकेट गणेश दान बीठू ने कहा कि वन्यजीवों का संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह समाज के प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। सींथल के ग्रामीणों ने अपनी सजगता और एकजुटता से यह साबित कर दिया कि अपराध को रोकने के लिए हर संभव प्रयास किया जा सकता है।
इस पूरी कार्रवाई में रामगोपाल बिश्नोई, हरिराम खीचड़, ओमप्रकाश नाई, कमल पंचारिया, श्याम सुंदर स्वामी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने सक्रिय भूमिका निभाई। यह घटना वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति स्थानीय समुदाय की संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता का एक अनूठा उदाहरण है। यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या सामुदायिक सहभागिता से वन्यजीव अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है।