यह आदेश जारी होते ही ई-मित्र संचालकों में नाराजगी की लहर दौड़ गई। उन्होंने तत्काल उपखंड अधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें उन्होंने अपनी कठिनाई व्यक्त करते हुए कहा कि सभी टोकनों का डेटा ईमेल करना संभव नहीं है। संचालकों का तर्क है कि जो गिरदावरी ऑनलाइन की गई है, उसका डेटा पहले से ही संबंधित विभाग के पास मौजूद है और उसे वहीं से प्राप्त किया जा सकता है।
ई-मित्र संचालकों का कहना है कि डेटा मेल करने की प्रक्रिया उनके लिए अत्यधिक परेशानी का सबब बनेगी। उनका मानना है कि विभाग को यह डेटा सीधे अपने सिस्टम से प्राप्त करना चाहिए, न कि ई-मित्र संचालकों पर बोझ डालना चाहिए।
इस मुद्दे पर एकजुटता दिखाते हुए, ई-मित्र संघर्ष समिति ने DOIT विभाग को चेतावनी दी है कि यदि विभाग ने अपना यह आदेश वापस नहीं लिया, तो उपखंड क्षेत्र के सभी ई-मित्र केंद्र अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। यह कदम आम नागरिकों के लिए परेशानी का सबब बन सकता है, जो इन केंद्रों के माध्यम से कई सरकारी सेवाओं का लाभ उठाते हैं।
इस विरोध प्रदर्शन में अमित कुमार, रतनलाल, हीरालाल, रामदयाल, हड़मानाराम, गोपालाराम, लेखराम, महेश सहित कई ई-मित्र संचालक शामिल हुए। उन्होंने अपनी मांगों को लेकर दृढ़ संकल्प दिखाया और विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
अब देखना यह है कि DOIT विभाग इस मामले में क्या रुख अपनाता है। क्या विभाग ई-मित्र संचालकों की चिंताओं को समझते हुए अपने आदेश में बदलाव करेगा, या फिर श्रीडूंगरगढ़ में ई-मित्र केंद्रों का अनिश्चितकालीन बंद देखने को मिलेगा? यह आने वाला समय ही बताएगा।