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खरीद शुरू करने सहित ट्रोमा और पानी के मुद्दे उठाए, कहा कैंप बने मजाक, आमजन से की अपील

श्रीडूंगरगढ़, 13 नवंबर 2025। पूर्व विधायक गिरधारीलाल महिया ने गुरुवार को एक प्रेस वार्ता में स्थानीय समस्याओं को लेकर सरकार और प्रशासन पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन “गूंगे-बहरे” हो गए हैं, जो किसानों और आम नागरिकों की तकलीफों को सुनने को तैयार नहीं हैं।

महिया ने विशेष रूप से समर्थन मूल्य पर खरीद में आ रही दिक्कतों, शहर में पानी की किल्लत और क्षेत्र में ट्रोमा सेंटर की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने आमजन से इन समस्याओं को गंभीरता से लेने और एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की।

उन्होंने बताया कि भारतीय किसान सभा के बैनर तले शुक्रवार को जिला कलेक्टर कार्यालय पर प्रदर्शन किया जाएगा, ताकि प्रशासन तक उनकी बात पहुंच सके। महिया ने मूंगफली खरीद में बिल की अनिवार्यता को किसानों को परेशान करने वाला कदम बताया और कहा कि भारतीय किसान सभा इसका पुरजोर विरोध करेगी। उनका कहना था कि प्रशासन को गड़बड़ी की जांच करनी चाहिए, लेकिन किसानों को बेवजह परेशान नहीं करना चाहिए।

महिया ने कहा कि बीकानेर संभाग में सबसे ज्यादा मूंगफली यहीं होती है। 2001 में समर्थन मूल्य पर खरीद शुरू हुई थी और 2014 तक सरकार पूरी मूंगफली खरीदती थी। बाद में खरीद सीमा 24 क्विंटल प्रति किसान कर दी गई, जिसे पिछले वर्ष 40 क्विंटल किया गया। उन्होंने वर्तमान हालातों पर चिंता जताते हुए कहा कि किसान आर्थिक रूप से बदहाल हो रहे हैं और बैंकों का कर्ज तथा बिजली बिल भरने में भी असमर्थ हैं।

उन्होंने सरकार पर खरीद शुरू करने में देरी करने का आरोप लगाया, जिसके चलते किसान बाजार में कम दाम पर मूंगफली बेचने को मजबूर हैं और उन्हें प्रति क्विंटल दो से ढाई हजार रुपये का नुकसान हो रहा है। महिया ने नैफेड द्वारा बाजार में मूंगफली बेचने पर तत्काल रोक लगाने और खरीद प्रक्रिया को जल्द शुरू करने की मांग की। उन्होंने पूरे प्रदेश में कहीं भी खरीद में बिजली बिल की अनिवार्यता न होने का हवाला देते हुए इसे अव्यवहारिक बताया और इसे तुरंत हटाने की मांग की। साथ ही, उन्होंने मूंग और मूंगफली की खरीद क्षमता बढ़ाने की भी बात कही।

पूर्व विधायक ने क्षेत्र में ट्रोमा सेंटर की कमी पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इलाज के अभाव में लोग दम तोड़ रहे हैं और ट्रोमा निर्माण संघर्ष समिति 395 दिनों से धरना दे रही है। दो समुदायों के सौहार्द की मिसाल के रूप में स्थापित हो रहे ट्रोमा सेंटर के लिए कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिससे राजनीतिक और प्रशासनिक उदासीनता साफ़ झलकती है।

शहर में पानी की समस्या को लेकर महिया ने वर्तमान विधायक पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि शहर ने उन्हें सर्वाधिक वोट दिए, फिर भी उन्हें पानी की समस्या नजर नहीं आ रही है। उन्होंने कहा कि पालिका से लेकर पूरा शासन प्रशासन उनका है, फिर भी पानी की समस्या का हल क्यों नहीं हो रहा है?

महिया ने प्रशासन द्वारा लगाए जा रहे शिविरों को “मजाक” करार दिया। उन्होंने कहा कि उद्घाटन के बाद कोई भी प्रतिनिधि या अधिकारी शिविरों को संभालने नहीं पहुंचता और वहां काम नहीं हो रहे हैं। उन्होंने पूछा कि शिविरों में कितने पट्टे जारी किए गए, इसका कोई हिसाब क्यों नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक अधिकारी राजनीतिक भेदभाव कर रहे हैं और पूर्व जनप्रतिनिधि होने के बावजूद उनकी पार्टी सीपीआईएम को बीएलओ की बैठक में नहीं बुलाया गया, जबकि अन्य दलों को बुलाया गया। उन्होंने इस भेदभाव को बंद करने की मांग की।

इस प्रेस वार्ता ने एक बार फिर श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र की समस्याओं को उजागर किया है, जिन पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।

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