कृषि विभाग के अनुभवी अधिकारियों ने विक्रेताओं को खाद, बीज और कीटनाशक दवाइयों के बारे में विस्तृत प्रशिक्षण दिया। इस दौरान, अधिकारियों ने विक्रेताओं को यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया कि वे किसानों तक केवल गुणवत्तापूर्ण दवाइयां और आवश्यक कृषि आदान ही पहुंचाएं। विभागीय जांच पड़ताल की प्रक्रिया और मानकों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई, जिससे विक्रेता नियमों और गुणवत्ता नियंत्रण के प्रति सजग रहें।
विक्रेताओं ने कृषि विभाग के इस प्रयास की सराहना करते हुए अधिकारियों का आभार व्यक्त किया और उन्हें सम्मानित किया। प्रशिक्षण में, आदान विक्रेताओं को खाद, बीज और कीटनाशक के गुण नियंत्रण और रिकॉर्ड संधारण के महत्व के बारे में विस्तार से बताया गया, जिससे वे किसानों को बेहतर सेवा प्रदान कर सकें और गुणवत्तापूर्ण कृषि आदानों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
संयुक्त निदेशक मदनलाल ने बताया कि 23 सितंबर से 15 नवंबर तक रबी गुण नियंत्रण अभियान चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य कृषि आदानों की गुणवत्ता को बनाए रखना है। सहायक निदेशक सुरेन्द्र मारू ने डीएपी की कमी के विकल्प के रूप में एसएसपी और यूरिया के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। सहायक निदेशक रघुवर दयाल सुथार ने कृषि आदान विक्रय परिसर में रखे जाने वाले रिकॉर्ड को अद्यतन रखने और गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की बिक्री सुनिश्चित करने के महत्व पर प्रकाश डाला।
सहायक कृषि अधिकारी धन्नाराम बेरड ने लाइसेंस आवेदन प्रक्रिया और रिकॉर्ड संधारण पर उपयोगी जानकारी दी, जबकि कृषि अधिकारी महेंद्र प्रताप ने लाइसेंस के अनुसार आदान विक्रय के नियमों पर चर्चा की। मेघराज बंजारा ने विक्रेताओं को यूरिया, डीएपी और अन्य आदानों की बिक्री से पहले विभागीय अधिकारियों को सूचित करने के बारे में जानकारी दी।
इस शिविर के समापन के बाद, खाद, बीज और कीटनाशक यूनियन की एक महत्वपूर्ण बैठक उसी प्रांगण में आयोजित की गई। बैठक में यूनियन के आगामी कार्यक्रमों और नई कार्यकारिणी के गठन पर विचार-विमर्श किया गया। मुखराम गोदारा ने जानकारी दी कि यूनियन की आगामी तहसील स्तरीय बैठक 30 सितंबर को तेजा मंदिर प्रांगण में आयोजित की जाएगी। इस बैठक में यूनियन के सभी सदस्य भाग लेंगे और तहसील स्तरीय नई कार्यकारिणी का गठन किया जाएगा।
बैठक में गोपीराम सिहाग, कृषि मंडी उपाध्यक्ष लालनाथ सिद्ध, ओमप्रकाश बाना, शंकरनाथ सिद्ध, भैराराम महिया, बाबूलाल स्वामी, रामलाल महिया, सुल्तान स्वामी, मुन्नीराम बाना, चुननाथ सिद्ध, मुकेश ज्याणी, राजेंद्र बिश्नोई, सुरेश सारस्वत, रामपाल सहू, सुरेन्द्र सिद्ध, भरत सिद्ध, लेखराम गोदारा, जेठमल बाना, भवानी जाखड़, मांगीलाल सहू, मांगीलाल गोदारा, बजरंग महिया सहित अनेक खाद बीज कीटनाशक व्यापारी मौजूद थे। सबकी उपस्थिति इस बात का प्रमाण थी कि श्रीडूंगरगढ़ के कृषि समुदाय में एकजुटता और सहयोग की भावना प्रबल है।
यह प्रशिक्षण शिविर और यूनियन की बैठक, दोनों ही श्रीडूंगरगढ़ के कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने और किसानों को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।