व्यवस्थापक यूनियन श्रीडूंगरगढ़ के अध्यक्ष गोविंद पारीक ने इस मौके पर बताया कि राज्य और केंद्र सरकार द्वारा उनकी कई मांगों को लगातार अनदेखा किया जा रहा है। इनमें ब्याज समितियों को राहत प्रदान करना, वर्षों से रुकी हुई स्क्रीनिंग प्रक्रिया को पूरा करना और वेतन संबंधी कैडर व्यवस्था को लागू करना शामिल है।
पारीक ने आगे कहा कि इन मांगों के लंबित रहने के कारण योग्य कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ नहीं मिल पा रहा है, जिससे वे आर्थिक असमानता का सामना करने को मजबूर हैं।
यूनियन ने यह भी मांग की है कि ऋण पर्यवेक्षकों के रिक्त पदों पर व्यवस्थापकों की भर्ती की जाए, जिससे कामकाज में सुधार हो और बेरोजगारी की समस्या से भी कुछ हद तक निजात मिल सके।
इस प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ही कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं की जाती है, तो वे आंदोलन को और भी उग्र रूप देने के लिए बाध्य होंगे।
आज के इस विरोध प्रदर्शन में रामनिवास नैण, कल्याण सिंह, लिखमाराम तर्ड, विशनदास स्वामी, रामस्वरूप गोदारा, राजू चोटियां, भागीरथ बाना, डूंगराराम गोदारा, डूंगर सिंह, मालाराम बाडेला, रेवंतराम, भवानी शंकर, राजेश कुमार सहित क्षेत्र की सभी समितियों के व्यवस्थापक शामिल हुए। सबकी एक ही मांग थी – सरकार उनकी समस्याओं पर ध्यान दे और उन्हें न्याय दिलाए।