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कम दाम में बिक रहा था संदिग्ध ‘सरस घी’ : उरमूल डेयरी की सजगता से खुला मिलावटखोरी का बड़ा जाल, बैच नंबर और पैकिंग में मिली गड़बड़ी

दरअसल, उरमूल डेयरी को सूचना मिली कि श्रीडूंगरगढ़ में सरस घी, सामान्य से काफी कम दाम पर बेचा जा रहा है। इस सूचना ने डेयरी प्रबंधन के मन में संदेह पैदा किया। क्या वाकई इतना सस्ता घी मिल सकता है? या फिर दाल में कुछ काला है?

संदेह को दूर करने के लिए, डेयरी प्रबंधन ने एक योजना बनाई। एक ग्राहक को सादे कपड़ों में भेजा गया, जिसने मौके पर 15 किलो घी का टिन खरीदा और भुगतान किया। जैसे ही लेन-देन पूरा हुआ, उरमूल डेयरी और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग (सीएमएचओ) की टीमें मौके पर पहुंच गईं।

शुरूआती जांच में ही गड़बड़ी पकड़ में आ गई। टिन पर लिखे बैच नंबर, निर्माण तिथि और एक्सपायरी डेट, पैकिंग गत्ते पर छपी जानकारी से मेल नहीं खा रहे थे। ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने कागज़ पर कुछ और, और टिन पर कुछ और छाप दिया हो।

इतना ही नहीं, टिनों पर अलग-अलग जिलों की डेयरियों के निशान भी मिले। ये निशान एक पेचीदा कहानी बयां कर रहे थे, जिसमें मिलावट की आशंका और भी गहरा गई। टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मौके से घी के कई नमूने जब्त किए और उन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया।

इस बीच, फर्म के मालिक से पूछताछ की गई, लेकिन उनके जवाब भ्रामक थे। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने गोदाम का सही पता बताने में टालमटोल की और टीम को गुमराह करने की कोशिश की। दुकान का नाम “बद्रीलाल श्याम सुंदर राठी” बताया गया है, जो अमर पट्टी, श्रीडूंगरगढ़ में स्थित है।

हालांकि, जब टीम श्रीडूंगरगढ़ थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने गई, तो पुलिस ने कहा कि ऐसे मामले जयपुर स्तर पर दर्ज होते हैं। इस वजह से, मामला फिलहाल सीएमएचओ और खाद्य सुरक्षा विभाग के पास जांच के लिए लंबित है।

उरमूल डेयरी के प्रबंध संचालक बाबूलाल बिश्नोई के निर्देशन में यह कार्रवाई की गई। टीम में प्लांट मैनेजर ओमप्रकाश भांभू, क्वालिटी कंट्रोल प्रभारी आर.एस. सैंगर, मार्केटिंग प्रभारी मोहन सिंह चौधरी और सीएमएचओ टीम से भानूप्रकाश, सुरेंद्र और राकेश गोदारा जैसे अधिकारी शामिल थे।

यह समझना जरूरी है कि खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत खाद्य पदार्थों में मिलावट एक गंभीर अपराध है। दोषी पाए जाने पर छह महीने से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। नकली घी में अक्सर वनस्पति तेल या रासायनिक पदार्थ मिलाए जाते हैं, जो लिवर, हार्ट और किडनी जैसे महत्वपूर्ण अंगों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकते हैं।

राजस्थान में पिछले कुछ वर्षों में डेयरी उत्पादों में मिलावट के मामले बढ़े हैं। उपभोक्ताओं को सस्ते दाम पर ब्रांडेड घी मिलने का लालच भारी पड़ सकता है। उरमूल डेयरी की यह कार्रवाई न केवल मिलावटखोरी का खुलासा है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि “कम दाम का मतलब हमेशा अच्छा सौदा नहीं होता।” हमें यह याद रखना चाहिए कि स्वास्थ्य से बढ़कर कुछ नहीं होता, और शुद्धता की कीमत लापरवाही से कहीं ज्यादा होती है।

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