11 अक्टूबर को रवाना हुए इस दल ने उदयपुर, चित्तौड़गढ़ और नाथद्वारा के महत्वपूर्ण स्थलों का दौरा किया। सांवलिया सेठ मंदिर में दर्शन के साथ शुरू हुई इस यात्रा में चित्तौड़गढ़ के दुर्ग और नाथद्वारा में भगवान शिव की विशाल प्रतिमा और श्रीनाथजी के मंदिर के दर्शन भी शामिल थे।
दल ने उदयपुर में हल्दीघाटी, फतेहसागर झील, पिछोला झील, दूध तलाई और सहेलियों की बाड़ी जैसे दर्शनीय स्थलों का भ्रमण किया।
प्रधानाचार्य डॉ. रजनीश कौशिक ने बताया कि राजस्थान की अद्भुत भौगोलिक विविधता और वीरतापूर्ण इतिहास को जानकर बच्चे आश्चर्यचकित थे। हल्दीघाटी के रणक्षेत्र को देखकर विद्यार्थियों ने उस ऐतिहासिक युद्ध के बारे में जाना और भारत माता के जयकारे लगाए। कई विद्यार्थियों ने हल्दीघाटी की माटी को श्रद्धा से माथे पर लगाया और कुछ तो चुटकी भर मिट्टी अपने साथ भी लाए।
दल ने मेवाड़ के रहन-सहन को करीब से देखा और वहां के लोगों से मिलकर उनकी संस्कृति को समझा। उपप्रधानाचार्य सुनीता कौशिक ने बताया कि यह शैक्षणिक भ्रमण केवल इतिहास और भूगोल तक सीमित नहीं था, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जानकारियों से भी परिपूर्ण था।
विद्यार्थियों ने पहली बार जाना कि मेवाड़ में राजा एकलिंग जी (भगवान शिव) को माना जाता है और वहां के राणा स्वयं को उनका दीवान और प्रजापालक मानते थे। कई विद्यार्थियों ने डायरी में विभिन्न स्थानों के नाम, राणाओं के नाम, जौहर की घटनाओं, गौरवगान करने वाले लेखकों के नाम और उनके संघर्षों के बारे में जानकारी दर्ज की।
स्कूल पहुंचने पर स्टाफ और अभिभावकों ने दल का स्वागत किया। विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों ने सफल और सुरक्षित यात्रा के लिए स्कूल प्रबंधन के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस यात्रा ने निश्चित रूप से विद्यार्थियों के मन में वीरता, शौर्य और राष्ट्रप्रेम की गहरी छाप छोड़ी है, और उन्हें अपने इतिहास और संस्कृति के प्रति और अधिक जागरूक बनाया है।