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आधी रात जन्मे कृष्ण, श्रीडूंगरगढ़ का गगन पटाखों से और धरती जयकारों से गूंज उठी।

श्रीडूंगरगढ़, 17 अगस्त 2025। आधी रात की नीरवता भंग हुई, जब श्रीडूंगरगढ़ कृष्णमय हो उठा। जन-जन के आराध्य, भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की घड़ी जैसे ही आई, आसमान पटाखों की गड़गड़ाहट से भर गया और धरती जयकारों से गूंज उठी। मंदिरों और घरों में घंटियों, शंखों और थालियों की मधुर ध्वनि ने वातावरण को भक्ति के रंग में रंग दिया।

हर घर में भगवान कृष्ण की सुंदर झाँकियाँ सजाई गईं, जहाँ पूजन और आरती के आयोजन संपन्न हुए। ठाकुरजी के मंदिरों में आनंद की वर्षा हुई, श्रद्धालु तालियाँ बजाते और “जय कन्हैयालाल” के जयकारे लगाते हुए भक्ति में लीन हो गए। आरती दर्शन के बाद लोगों ने श्रद्धापूर्वक नंदोत्सव मनाया।

आड़सर बास के ठाकुरजी मंदिर में भजन-कीर्तन के साथ उत्सव का माहौल था। यहाँ लड्डूगोपाल को सजाकर लाने वालों को पुरस्कृत किया गया, बच्चों को खिलौने बांटे गए और छप्पन भोग का प्रसाद वितरित किया गया। झूलेलाल मंदिर में भजन गीतों पर मनमोहक बाल प्रस्तुतियाँ हुईं, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ जयकारे लगाए। मटकी फोड़ कार्यक्रम के साथ आयोजन संपन्न हुआ।

गांव लिखमादेसर के ठाकुरजी मंदिर प्रांगण में भी कृष्ण जन्मोत्सव का अद्भुत उल्लास देखने को मिला। श्रद्धा और भक्ति के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस आयोजन में शामिल हुए। पारंपरिक पूजन के बाद भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ, और मटकी फोड़ कार्यक्रम के साथ भक्तिमय आयोजन संपन्न हुआ।

इस अवसर पर श्रीडूंगरगढ़ में हर तरफ आस्था और उल्लास का संगम दिखाई दिया, जिसने हर किसी को कृष्ण भक्ति के सागर में डुबो दिया।

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