पंडित कृष्ण शर्मा ने जानकारी दी कि पूर्णिमा से एक दिन पहले, सुबह 7 बजे माताओं और बहनों को कार्तिक महात्म्य कथा सुनाई गई। इस कथा में भगवान शंकर और दैत्य जलंधर के बीच हुए युद्ध की दिव्य गाथा का वर्णन किया गया, जिसने श्रोताओं को भक्ति और शक्ति के अद्भुत संगम से परिचित कराया। इसके साथ ही तुलसी पूजन और तुलसी विवाह से जुड़ी प्रसिद्ध कथा ‘तुलसी दाता सत की दाता’ का बखान भी किया गया, जिसने तुलसी के महत्व और उसके सत गुणों को उजागर किया।
कथा के समापन पर हवन कर पूर्णाहुति दी गई, जिसमें उपस्थित श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से आहुतियां अर्पित कीं। मंदिर के पुजारी श्रवण कुमार शर्मा ने बताया कि आज शाम 7 बजे मंदिर परिसर में देव दीपावली का आयोजन किया जाएगा। मंदिर को दीपों की रोशनी से सजाया जाएगा और मंगल आरती के साथ कार्यक्रम का समापन होगा। माना जा रहा है कि देव दीपावली के इस आयोजन में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेंगे, जो इस मंदिर के प्रति अपनी अटूट आस्था का प्रतीक है।