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आओ! इस दीपावली पर भगवती महालक्ष्मी का करें विधिपूर्वक आह्वान….डूंगरगढ़ one के साथ

हर गृहस्थ की अभिलाषा होती है कि उसके घर में माँ लक्ष्मी का वास हो, सुख-समृद्धि बनी रहे। इसके लिए लोग अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार अनेक उपाय करते हैं। माँ लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र पर फल, नैवेद्य, पुष्प और बताशे अर्पित किए जाते हैं। दीपों से घर जगमगा उठता है।

शास्त्रों में माँ लक्ष्मी के पूजन की विस्तृत विधियां वर्णित हैं, लेकिन आम जन भी कुछ सरल चरणों का पालन करके अपने घर या प्रतिष्ठान में माँ का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। आईये जानते हैं वर्ष 2025 में आने वाले धनतेरस और दीपावली के शुभ अवसर पर माँ लक्ष्मी की पूजा का विधान।

कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि दोपहर 12:20 बजे से शुरू होगी। इस दिन पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र दोपहर 3:42 तक रहेगा, उसके बाद उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र लगेगा। चंद्रमा सिंह राशि में होंगे, लेकिन रात्रि 10:12 बजे के बाद कन्या राशि में प्रवेश करेंगे।

* **विशेष पूजन काल:** सायं 6:03 से रात्रि 8:35 बजे तक यम दीप दान, श्री पूजन और श्री धन्वंतरि पूजन के लिए विशेष शुभ मुहूर्त है।
* **खरीददारी का विशेष मुहूर्त (श्रीडूंगरगढ़ समयानुसार):** दोपहर 12:20 से 12:41 बजे तक और शाम 3:00 से 4:31 मिनट तक (अमृत वेला) खरीदारी के लिए शुभ रहेगा।

कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी सायं 3:45 बजे के बाद अमावस्या आरम्भ होगी। हस्त नक्षत्र रात्रि 8:17 तक रहेगा, उसके बाद चित्रा नक्षत्र लगेगा। चंद्रमा कन्या राशि में होंगे।

* **बही पूजन विशेष मुहूर्त (श्रीडूंगरगढ़ समयानुसार):** सुबह 11:54 से 12:42 तक (अभिजीत मुहूर्त) और शाम 4:32 से 5:57 तक (अमृत वेला) बही पूजन के लिए श्रेष्ठ है।

* प्रातः 6:44 से 9:33 बजे तक (लाभ व अमृत वेला)
* सुबह 10:58 से दोपहर 12:22 बजे तक (शुभ वेला)

माँ लक्ष्मी की पूजा के लिए कुछ आवश्यक सामग्री इस प्रकार है:

* रोली
* चावल
* कलावा
* धूप
* दीप
* कपूर
* अगरबत्ती
* फल
* फूल
* मिठाई
* पंचामृत
* गंगाजल
* लाल वस्त्र
* श्री लक्ष्मी और गणेश की मूर्तियाँ या चित्र
* कलश
* नारियल
* सुपारी
* पान के पत्ते
* लौंग
* इलायची
* बताशे
* चांदी या कांसी की थाली

1. चांदी या कांसी की थाली में कुमकुम से स्वास्तिक बनाएं।
2. एक सुपारी पर मोली लपेटकर उसे गणेश के रूप में स्वास्तिक पर स्थापित करें।
3. तांबे, पीतल या मिट्टी के कलश में जल भरकर उसमें सुपारी, पीली सरसों, सर्व औषधि और सिक्का डालें।
4. कलश पर मोली बांधें, स्वास्तिक बनाएं और पांच पान के पत्ते लगाकर नारियल स्थापित करें।
5. एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर गणेश, लक्ष्मी और कलश की स्थापना ईशान कोण (पूर्व-उत्तर) में करें।
6. यजमान सपत्नीक पूर्वाभिमुख बैठें।
7. पंचामृत, गंध, पुष्प, दीप, धूप आदि सामग्री तैयार करें।

1. **शुद्धिकरण मंत्र:**
“ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा।
यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥
ॐ पुण्डरीकाक्षः पुनातु (3 बार उच्चारण करें)।”

2. **गणेश एवं गौरी ध्यान:**
“वक्रतुंड महाकाय कोटिसूर्यसमप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥”

“नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः।
नमः प्रकृत्यै भद्रायै नियता: प्रणता: स्म ताम॥”

3. **गणेश-अम्बिका पूजन:**
* धूप दिखाएं: ॐ गणेशाम्बिकाभ्यां नमः धूपमाघ्रापयामि।
* दीपक दिखाएं: ॐ गणेशाम्बिकाभ्यां नमः दीपं दर्शयामि।
* प्रसाद अर्पित करें: ॐ गणेशाम्बिकाभ्यां नमः नैवेद्यं निवेदयामि।
* पुष्प अर्पण करें: ॐ गणेशाम्बिकाभ्यां नमः गन्धाक्षत पुष्पं समर्पयामि।

4. **कलश पूजन:**
कलश के अंदर देवी-देवताओं का ध्यान करें:

“कलशस्य मुखे विष्णुः कण्ठे रुद्रः समाश्रितः।
मूले त्वस्य स्थितो ब्रह्मा मध्ये मातृगणाः स्मृताः॥
कुक्षौ तु सागराः सर्वे सप्तद्वीपा वसुन्धरा।
ऋग्वेदोऽथ यजुर्वेदः सामवेदो ह्यथर्वणः॥
अङ्गैश्च सहिताः सर्वे कलशं तु समाश्रिताः।
अत्र गायत्री सावित्री शान्तिः पुष्टिकरी तथा॥
आयान्तु देवपूजार्थं दुरितक्षयकारकाः।
गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति।
नर्मदे सिन्धुकावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु॥
सर्वे समुद्राः सरितस्तीर्थानि जलदा नदाः।
आयान्तु मम शान्त्यर्थं दुरितक्षयकारकाः॥”

भगवान वरुण को धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें और पुष्प अर्पित करें।

5. **श्री महालक्ष्मी पूजन विधि:**

* ध्यान एवं आह्वान: ॐ लक्ष्मी गणपतिभ्यां नमः ध्यानार्थे पुष्पाणि समर्पयामि। बोलते हुए पुष्प चढ़ाएं।
* ॐ लक्ष्मी गणपतिभ्यां नमः आह्वनार्थे पुष्पाणि समर्पयामि।
* ॐ लक्ष्मी गणपतिभ्यां नमः आसनार्थे पुष्पाणि समर्पयामि। बोलकर आसन के लिए पुष्प अर्पित करें।

6. **स्नान एवं अभिषेक विधि:**
* ॐ लक्ष्मी गणपतिभ्यां नमः बोलकर 4 बार जल चढ़ाएं और बोलें – पादयो: पाद्य समर्पयामि। हस्तयोर्घ्यम समर्पयामि। आचमनीयम समर्पयामि। सर्वांगेषु स्नानम समर्पयामि।
* पंचामृत स्नान: दूध, दही, घी, मधु, शर्करा।
* पंचामृत के बाद शुद्ध जल से स्नान।
* गंधयुक्त चंदन जल से स्नान।
* वस्त्र, आभूषण, इत्र, सिंदूर, कुमकुम, पुष्प अर्पण करें।
* धूप, दीप, नैवेद्य, फल, ताम्बूल, दक्षिणा अर्पित करें।

7. **आरती और समापन मंत्र:**

“वक्रतुण्ड महाकाय कोटिसूर्यसमप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥”

“या देवी सर्व भूतेषु महालक्ष्मीरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”

फिर कहें — ॐ अनेन यथाशक्ति अर्चनेन श्री महालक्ष्मीः प्रसीदतु। आसन को प्रणाम करें और श्रद्धा से पूजन पूर्ण करें।

माँ लक्ष्मी की यह पूजा विधि हमें याद दिलाती है कि भक्ति और श्रद्धा से किया गया कर्म सदैव फलदायी होता है। माँ लक्ष्मी की कृपा से आपके घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहे।

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