श्रीडूंगरगढ़, 16 अक्टूबर 2025। भाषा, साहित्य, संस्कृति, कला, इतिहास और शोध को समर्पित त्रैमासिक पत्रिका ‘राजस्थली’ अपने स्वर्ण जयंती वर्ष में प्रवेश कर रही है। इस अवसर पर, पत्रिका कई नवीन प्रयासों के साथ लोक चेतना के नए अध्याय लिखने की ओर अग्रसर है। इसी क्रम में, राजस्थली ने बच्चों के माध्यम से राजस्थानी भाषा के प्रचार-प्रसार का एक महत्वाकांक्षी अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है।
राजस्थली के प्रधान संपादक श्याम महर्षि के अनुसार, यह ‘जनजागरण अभियान’ आगामी 14 नवम्बर, बाल दिवस से प्रारंभ होगा। इस दौरान, प्रभात फेरियां, रैलियां और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनका उद्देश्य राजस्थानी भाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाना और बच्चों को इस भाषा से जोड़ना है।
प्रबंध संपादक रवि पुरोहित ने इस पहल को नई पीढ़ी को राजस्थानी भाषा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। उन्होंने कहा कि देशभर में पहली बार इस तरह का प्रयास किया जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत, 16 नवम्बर को श्रीडूंगरगढ़ के संस्कृति भवन में ‘कला डूंगर कल्याणी स्मृति राजस्थानी बाल साहित्य सम्मान योजना’ के तहत राजस्थानी प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा।
यह प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता विमला नागला की पुरस्कृत एवं प्रकाशित कृति ‘बातां री मुळक’ पर आधारित होगी। इसमें श्रीडूंगरगढ़ तहसील के सरकारी और निजी विद्यालयों के कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थी भाग ले सकते हैं।
कार्यक्रम की समन्वयक भगवती पारीक ‘मनु’ और प्रबंधक सरोज शर्मा को नियुक्त किया गया है। भगवती पारीक ‘मनु’ ने बताया कि यह प्रयास बागेश्वरी साहित्य, कला, सांस्कृतिक विरासत संस्था, बीकानेर के सहयोग से किया जा रहा है, ताकि राजस्थानी की समृद्ध परंपरा और भाषा को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सके। यह प्रयास राजस्थानी भाषा को जीवित रखने और उसे आगे बढ़ाने में सहायक होगा।
सरोज शर्मा ने बताया कि प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को नगद पारितोषिक और सम्मान पत्र दिए जाएंगे। इच्छुक प्रतिभागी समन्वयक या प्रबंधक से संपर्क कर विवेच्य पुस्तक की निःशुल्क प्रति प्राप्त कर सकते हैं।
एक विद्यालय से अधिकतम तीन विद्यार्थी प्रतियोगिता में भाग ले सकेंगे। प्रतियोगिता के लिए 30 अक्टूबर तक आवेदन किए जा सकते हैं। इस पहल से निश्चित रूप से बच्चों में राजस्थानी भाषा के प्रति रुचि बढ़ेगी और वे अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ेंगे।